“अरुणभूमि न्यूज़: अरुणाचल की स्थानीय आवाज़ को राष्ट्रीय मंच देने वाला पहला हिंदी अख़बार”
यह कहानी है ताकम सोनिया जी की — Arunbhoomi News के संस्थापक, जिन्होंने अरुणाचल प्रदेश में हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी। सीमित संसाधनों, चुनौतियों और भाषाई विविधता के बीच उन्होंने यह साबित किया कि अगर संकल्प मजबूत हो तो स्थानीय आवाज़ें भी राष्ट्रीय स्तर पर गूंज सकती हैं।
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Foundersinfo | Naval Kumar
10/28/20251 min read
“अगर सपना सच्चा हो और मेहनत निरंतर हो — तो अरुणाचल की आवाज़ भी भारत की धड़कन बन सकती है।”
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश की धरती से उठी एक ऐसी आवाज़ जिसने यह साबित किया कि अगर इरादा सच्चा हो, तो सीमाएँ भी रास्ता बन जाती हैं।
यह कहानी है Arunbhoomi News के संस्थापक ताकम सोनिया जी की — जिन्होंने अरुणाचल प्रदेश में पहला हिंदी अख़बार शुरू कर एक नया इतिहास रचा।
अरुणाचल की वादियों में एक सवाल गूंजा — “जब हर कोई हिंदी बोलता है, तो यहां कोई हिंदी अख़बार क्यों नहीं?”
यही सवाल एक युवा पत्रकार के दिल में चिंगारी बन गया। उसका नाम था ताकम सोनिया, और इस सवाल ने उसकी ज़िंदगी की दिशा तय कर दी।
दिल्ली के सेवाधाम विद्यालय में पढ़ने वाला यह साधारण लड़का हिंदी को सिर्फ एक विषय की तरह नहीं, बल्कि अपनी पहचान की तरह मानता था। सेवाधाम से लेकर यूनिवर्सिटी तक उसने हर परीक्षा, हर डिग्री हिंदी में पूरी की — बी.ए., एम.ए., बी.एड — सब कुछ। जब उसने अरुणाचल की मिट्टी में कदम रखा, तो देखा कि यहाँ के लोग टूटी-फूटी हिंदी में बातें तो करते हैं, पर उनकी आवाज़ कहीं लिखी नहीं जाती। सब बोलते हैं, कोई लिखता नहीं। बस यहीं से अरुणभूमि न्यूज़ का बीज पड़ा।
साल 2018। ताकम सोनिया ने अरुणाचल प्रदेश का पहला हिंदी अख़बार शुरू किया — अरुणभूमि न्यूज़।
न कोई बड़ा निवेश, न कोई एडवर्टाइजिंग टीम, न कोई फैक्ट्री। बस एक सपना था — कि इस पहाड़ी प्रदेश की कहानियाँ, संघर्ष और सच्चाई भी पूरे देश तक पहुँचे। वह चाहता था कि अरुणाचल के लोग अपनी भाषा में, अपने शब्दों में अपनी बात कहें।
शुरुआत आसान नहीं थी। बहुत लोगों ने कहा, “अब तो सब मोबाइल पर पढ़ते हैं, अख़बार कौन खरीदेगा?”
पर ताकम सोनिया ने ठान लिया था। वो खुद लिखते, खुद फोटो खींचते, खुद रिपोर्टिंग करते, और कई बार खुद ही अख़बार बाँटने भी निकल जाते।
कभी किसी दुकानवाले ने तेल का खर्चा दे दिया, कभी किसी आयोजन से थोड़ा सहयोग मिला, तो वही अगले दिन के अख़बार का आधार बनता।
वो कहते हैं, “हमारे पास पैसा नहीं था, पर लोगों का भरोसा था।”
धीरे-धीरे अरुणभूमि लोगों की जुबान पर आने लगा। अब वो सिर्फ अख़बार नहीं रहा, बल्कि एक आंदोलन बन गया — जो स्थानीय मुद्दों को आवाज़ देता, भ्रष्टाचार पर सवाल उठाता, और जनता के पक्ष में खड़ा रहता।
ताकम सोनिया का मानना है कि मीडिया का काम केवल खबरें देना नहीं, बल्कि सच्चाई दिखाना है।
वो कहते हैं, “अगर करप्शन मेरे परिवार में भी हो, तो भी मैं सच बोलूंगा। गलत वही है जो जनता के खिलाफ है।”
कई बार धमकियाँ मिलीं, डराने की कोशिशें हुईं, लेकिन वो मुस्कुरा कर कहते हैं,
“अगर डरना होता तो अख़बार क्यों खोलता? सच कहने की हिम्मत ही पत्रकार की सबसे बड़ी पूंजी है।”
ताकम सोनिया का सफर उन युवाओं के लिए भी एक संदेश है जो किसी सपने को लेकर डरते हैं।
वो कहते हैं, “करोड़ों की जरूरत नहीं, बस मेहनत चाहिए। आज हर किसी के पास एक फोन है, वहीं से शुरुआत करो।”
उनकी नज़र में पत्रकारिता एक व्यवसाय नहीं, एक जिम्मेदारी है — समाज को जोड़ने, जगाने और बदलने की।
आज अरुणभूमि न्यूज़ सिर्फ एक अख़बार नहीं, बल्कि अरुणाचल की आत्मा की आवाज़ है।
यह कहानी बताती है कि अगर इरादा सच्चा हो, तो छोटे-से राज्य की आवाज़ भी राष्ट्रीय मंच पर गूंज सकती है।
ताकम सोनिया ने दिखाया कि सीमित संसाधनों में भी बड़ा सपना सच किया जा सकता है — बस ज़रूरत है भरोसे की, लगन की और अपने लोगों के लिए काम करने की इच्छा की।
यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। क्योंकि हर कहानी तब तक अधूरी है जब तक आप उसे सुन न लें उस व्यक्ति की ज़ुबानी, जिसने उसे जिया हो।
🎧 अब सुनिए ताकम सोनिया जी की पूरी यात्रा, उन्हीं की आवाज़ में —
👉 FoundersInfo Podcast – Episode 1: Arunbhoomi News की कहानी (YouTube पर देखें)
“यह कहानी सिर्फ अरुणाचल की नहीं, हर उस इंसान की है जिसने सपना देखने की हिम्मत की — और उसे सच कर दिखाया।”
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